अमरीका में पिछले कई दशकों की सबसे भीषण ठंड पड़ रही है. उत्तरी ध्रुव की ओर से चल रहे बर्फ़ीले चक्रवात की वजह से अमरीका के मध्य-पश्चिम राज्यों में बर्फ़ की चादर बिछ गई है. इसे पोलर वोर्टेक्स कहा जा रहा है.
इसकी वजह से यहां के 9 करोड़ से अधिक लोग शून्य से -17 डिग्री तापमान में रहने को मजबूर हैं.
स्कूल, व्यापारिक प्रतिष्ठान और सरकारी दफ़्तर बंद हैं. समूचे मध्य-पूर्व राज्यों में सैकड़ों की संख्या में फ़्लाइट्स रद्द हो गई हैं.
शिकागो शहर में पारा शून्य से तीस डिग्री सेल्सियस नीचे हैं. शहर के मेयर ने लोगों से बाहर न निकलने की अपील की है. शिकागो नदी जम गई है.
मध्य-पश्चिम राज्यों विस्कॉन्सिन, मिशिगन और इलिनॉय के साथ ही आमतौर पर गर्म रहने वाले दक्षिणी राज्यों अलबामा और मिसीसिपी में आपातकाल घोषित कर दिया गया है.
मौसम विभाग के मुताबिक बर्फ़ गिरनी जारी रहेगी और कई इलाक़ों में 24 इंच तक बर्फ़ पड़ सकती है.
मौसम का पूर्वानुमान लगाने वालों का अनुमान है कि देश के सबसे व्यस्त शहरों में से एक शिकागो में आने वाले दिनों में अंटार्कटिका से भी अधिक ठंड पड़ सकती है.
10 राज्यों इलिनॉय, आयोवा, मिनिसोटा, नॉर्थ डैकोटा, साउथ डैकोटा, विसकॉन्सिन, कैनसस, मिज़ौरी और मोंटाना में जमकर बर्फ़बारी हो रही है.
रियान कोकूरेक शिकागो में ही रहते हैं. यहां के हालात के बारे में बीबीसी को बताते हुए उन्होंने कहा, "ये अविश्वसनीय है. मैंने जैसे ही घर के बाहर क़दम रखा ठंडी हवा का ऐसा थपेड़ा पड़ा कि सांस लेना मुश्किल हो गया. ये ऐसा है जैसे हवा में ऑक्सीजन ही न रही हो, दम घुट रहा हो, और अगर आपकी नाक बह रही है तो ये और भी ख़तरनाक है क्योंकि अचानक ही आपकी नाक जम जाती है. ये मेरे जीवन का सबसे अजीब अनुभव है."
पोलर वोर्टेक्स कहे जाने वाले ध्रुवीय चक्रवात की वजह से अमरीका के कई हिस्सों में जानलेवा ठंड पड़ रही है.
पोलर वोर्टेक्स की वजह से मौसम विभाग ने तापमान के शून्य से -40 से -70 डिग्री सेल्सियस तक नीचे जाने की चेतावनी जारी की है.
इसकी वजह से कम से कम साढ़े पांच करोड़ लोगों को जमानेवाले ठंड के अनुभव होने का अनुमान लगाया जा रहा है.
मौसम विभाग के अनुसार पोलर वोर्टेक्स (ध्रुवीय चक्रवात) से हवाओं में उतार-चढ़ाव के कारण पिछले साल दिसंबर से लेकर अब तक ठंड का असर उत्तर भारत में बढ़ता दिखा है.
प्रार्थना की, दो घंटे अपनी डेस्क पर कांग्रेस की नई ज़िम्मेदारियों के मसौदे पर काम किया और इससे पहले कि दूसरे लोग उठ पाते, छह बजे फिर सोने चले गए.
काम करने के दौरान वह अपनी सहयोगियों आभा और मनु का बनाया नींबू और शहद का गरम पेय और मीठा नींबू पानी पीते रहे. दोबारा सोकर आठ बजे उठे.
दिन के अख़बारों पर नज़र दौड़ाई और फिर ब्रजकृष्ण ने तेल से उनकी मालिश की. नहाने के बाद उन्होंने बकरी का दूध, उबली सब्ज़ियां, टमाटर और मूली खाई और संतरे का रस भी पिया.
शहर के दूसरे कोने में पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के वेटिंग रूम में नाथूराम गोडसे, नारायण आप्टे और विष्णु करकरे अब भी गहरी नींद में थे.
Wednesday, January 30, 2019
Tuesday, January 22, 2019
PAK कप्तान सरफराज ने अफ्रीकी बल्लेबाज को कहा- काला, लग सकता है बैन
पाकिस्तान के कप्तान सरफराज अहमद ने मंगलवार को साउथ अफ्रीका के खिलाफ डरबन में खेले गए दूसरे वनडे मैच में ऐसी हरकत की जिसके बाद उन पर बैन लगाया जा सकता है. दरअसल, सरफराज अहमद ने साउथ अफ्रीका के बल्लेबाज एंडिल फेहलुकवायो के खिलाफ नस्लीय टिप्पणी की थी और उनकी मां के लिए गलत शब्दों का इस्तेमाल किया था.
हुआ हूं कि दक्षिण अफ्रीका की पारी के 37वें ओवर की तीसरी गेंद पर जब एंडिल फेहलुकवायो ने सिंगल लेकर दौड़ लगाई तो विकेट के पीछे पाकिस्तान के कप्तान सरफराज अहमद ने उन पर नस्लीय टिप्पणी की जो स्टंप माइक ने पकड़ लिया. वीडियो में सरफराज कह रहे हैं, ‘अबे काले! तेरी अम्मी आज कहां बैठी हैं?’ आईसीसी अगर सरफराज अहमद को नस्लीय टिप्पणी करने का दोषी पाती है तो उन पर कम से कम 4 टेस्ट या 8 वनडे मैचों का प्रतिबंध लग सकता है.
आपको बता दें कि दक्षिण अफ्रीका ने मंगलवार को डरबन में पाकिस्तान को दूसरे वनडे मैच में पांच विकेट से हराकर पांच मैचों की सीरीज में एक-एक बराबरी कर ली. रास्सी वान डेर डुसेन और एंडिले फेहलुकवायो की नाबाद अर्धशतकीय पारियों की मदद से मेजबान टीम ने पाकिस्तान को पांच विकेट से रौंद दिया.
निचले क्रम के बल्लेबाज हसन अली की 59 रनों की पारी से पाकिस्तान ने पहले बल्लेबाजी करते हुये 203 रन का स्कोर खड़ा किया था, जिसके जवाब में मेजबान टीम ने शीर्ष क्रम के लड़खड़ाने के बावजूद 42 ओवर में ही आसानी से 204 रनों के लक्ष्य को हासिल कर लिया और शानदार जीत के बदौलत सीरीज 1-1 से बराबर कर ली.
फिर 5 नवम्बर 1925 की बात है. देशबंधु चित्तरंजन दास का कोलकाता में निधन हुआ. सुभाष ने उनकी मृत्यु की खबर माण्डले जेल में रेडियो पर सुनी. माण्डले जेल में रहते समय सुभाष की तबीयत बहुत खराब हो गई. उनकी हालत बहुत खराब थी. लेकिन अंग्रेज़ सरकार ने फिर भी उन्हें रिहा करने से इनकार कर दिया. बाद में सरकार ने उन्हें रिहा करने की शर्त रखी कि वे इलाज के लिये यूरोप चले जाएं. लेकिन सरकार ने यह साफ नहीं किया कि इलाज के बाद वे भारत कब लौट सकते हैं.
इसलिए सुभाष ने यह शर्त नहीं मानी. आखिर में उनकी हालत बहुत बिगड़ गई. जेल अधिकारियों को लगा कि शायद वे कारावास में ही उनकी मौत न हो जाए. अंग्रेज़ सरकार यह खतरा भी नहीं उठाना चाहती थी. लिहाजा सरकार ने उन्हें रिहा कर दिया. इसके बाद सुभाष इलाज के लिये डलहौजी चले गए. लेकिन इसके कुछ दिन बाद ही उन्हें फिर से गिरफ्तार कर लिया गया.
वर्ष 1930 में सुभाष जेल में बंद थे. लेकिन उन्होंने जेल से ही कोलकाता के मेयर का चुना लड़ा और वे जीत गए. इसलिए सरकार उन्हें रिहा करने पर मजबूर हो गई. 1932 में सुभाष को फिर से गिरफ्तार कर लिया गया. इस बार उन्हें अल्मोड़ा जेल में रखा गया. अल्मोड़ा जेल में उनकी तबीयत फिर से खराब होने लगी. इस बार नेताजी ने डॉक्टरों की सलाह मान ली और वे इलाज के लिये यूरोप जाने को राजी हो गए. इसके बाद वे यूरोप चले गए. वहां रहकर भी भारत की आजादी के लिए अपनी कोशिशों में लगे रहे. इस तरह से कुल मिलाकर उन्हें 11 बार जेल जाना पड़ा था.
हुआ हूं कि दक्षिण अफ्रीका की पारी के 37वें ओवर की तीसरी गेंद पर जब एंडिल फेहलुकवायो ने सिंगल लेकर दौड़ लगाई तो विकेट के पीछे पाकिस्तान के कप्तान सरफराज अहमद ने उन पर नस्लीय टिप्पणी की जो स्टंप माइक ने पकड़ लिया. वीडियो में सरफराज कह रहे हैं, ‘अबे काले! तेरी अम्मी आज कहां बैठी हैं?’ आईसीसी अगर सरफराज अहमद को नस्लीय टिप्पणी करने का दोषी पाती है तो उन पर कम से कम 4 टेस्ट या 8 वनडे मैचों का प्रतिबंध लग सकता है.
आपको बता दें कि दक्षिण अफ्रीका ने मंगलवार को डरबन में पाकिस्तान को दूसरे वनडे मैच में पांच विकेट से हराकर पांच मैचों की सीरीज में एक-एक बराबरी कर ली. रास्सी वान डेर डुसेन और एंडिले फेहलुकवायो की नाबाद अर्धशतकीय पारियों की मदद से मेजबान टीम ने पाकिस्तान को पांच विकेट से रौंद दिया.
निचले क्रम के बल्लेबाज हसन अली की 59 रनों की पारी से पाकिस्तान ने पहले बल्लेबाजी करते हुये 203 रन का स्कोर खड़ा किया था, जिसके जवाब में मेजबान टीम ने शीर्ष क्रम के लड़खड़ाने के बावजूद 42 ओवर में ही आसानी से 204 रनों के लक्ष्य को हासिल कर लिया और शानदार जीत के बदौलत सीरीज 1-1 से बराबर कर ली.
फिर 5 नवम्बर 1925 की बात है. देशबंधु चित्तरंजन दास का कोलकाता में निधन हुआ. सुभाष ने उनकी मृत्यु की खबर माण्डले जेल में रेडियो पर सुनी. माण्डले जेल में रहते समय सुभाष की तबीयत बहुत खराब हो गई. उनकी हालत बहुत खराब थी. लेकिन अंग्रेज़ सरकार ने फिर भी उन्हें रिहा करने से इनकार कर दिया. बाद में सरकार ने उन्हें रिहा करने की शर्त रखी कि वे इलाज के लिये यूरोप चले जाएं. लेकिन सरकार ने यह साफ नहीं किया कि इलाज के बाद वे भारत कब लौट सकते हैं.
इसलिए सुभाष ने यह शर्त नहीं मानी. आखिर में उनकी हालत बहुत बिगड़ गई. जेल अधिकारियों को लगा कि शायद वे कारावास में ही उनकी मौत न हो जाए. अंग्रेज़ सरकार यह खतरा भी नहीं उठाना चाहती थी. लिहाजा सरकार ने उन्हें रिहा कर दिया. इसके बाद सुभाष इलाज के लिये डलहौजी चले गए. लेकिन इसके कुछ दिन बाद ही उन्हें फिर से गिरफ्तार कर लिया गया.
वर्ष 1930 में सुभाष जेल में बंद थे. लेकिन उन्होंने जेल से ही कोलकाता के मेयर का चुना लड़ा और वे जीत गए. इसलिए सरकार उन्हें रिहा करने पर मजबूर हो गई. 1932 में सुभाष को फिर से गिरफ्तार कर लिया गया. इस बार उन्हें अल्मोड़ा जेल में रखा गया. अल्मोड़ा जेल में उनकी तबीयत फिर से खराब होने लगी. इस बार नेताजी ने डॉक्टरों की सलाह मान ली और वे इलाज के लिये यूरोप जाने को राजी हो गए. इसके बाद वे यूरोप चले गए. वहां रहकर भी भारत की आजादी के लिए अपनी कोशिशों में लगे रहे. इस तरह से कुल मिलाकर उन्हें 11 बार जेल जाना पड़ा था.
Thursday, January 10, 2019
राजनाथ सिंह एनडीए के लिए क्यों ज़रूरी हैं?
साल 2014 में बीजेपी के तत्कालीन अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने 2014 के चुनावों से पहले एनडीए का पुनर्गठन करना शुरू किया था जो कि एक आसान काम नहीं था.
इससे पहले अटल बिहारी वाजपेयी ने 1998 में एनडीए का गठन किया था. इसके बाद उनका बनाया हुआ गठबंधन 1998 से लेकर 2004 तक सत्ता में रहा.
लेकिन फिर एनडीए दस सालों के लिए सत्ता से बाहर हो गया. और एनडीए को बनाने वाले वाजपेयी भी राजनीति से संन्यास ले चुके थे.
ऐसे में 2014 में एनडीए के घटक दलों को एक छत के नीचे लाना एक जटिल काम था.
ऐसे में राजनाथ सिंह ने अपने भूले-बिसरे राजनीतिक साथियों को याद किया और ऐसे लोगों से भी हाथ मिलाए जो कि उनके पारंपरिक मित्रों में शामिल नहीं थे.
राजनाथ सिंह ने अपने अथक प्रयासों से जिस एनडीए का गठन किया वो उनके राजनीतिक गुरु अटल बिहारी वाजपेयी से भी बड़ा था.
ऐसे में कई लोगों ने राजनाथ सिंह को भविष्य के वाजपेयी के रूप में देखना शुरू कर दिया.
उल्लेखनीय बात ये है कि एनडीए के पुराने घटक दलों में से सिर्फ़ शिव सेना की विचारधारा ही बीजेपी से मेल खाती है.
इसके बाद भी जब-जब दोनों दलों के बीच किसी तरह की उठा-पटक होती थी तो वाजपेयी तत्कालीन शिव सेना प्रमुख बाला साहेब ठाकरे को फ़ोन करके बीच-बचाव करने की कोशिश करते थे.
साल 2014 में राजनाथ सिंह ने अटल बिहारी वाजपेयी की भूमिका को अदा किया. उन्होंने एनडीए के गठन में सामने आने वाली सभी रुकावटों को दूर कर दिया.
आज के दौर में अनुप्रिया पटेल नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में शामिल हैं. लेकिन इसके बावजूद 2019 के आम चुनाव में वह 'अपना दल' के लिए पर्याप्त सीटें हासिल करने में दुश्वारियों का सामना कर रही हैं.
इसके साथ ही एक दूसरे घटक दल सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी की बीजेपी से नाराज़गी जगज़ाहिर है.
इस दल के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर योगी आदित्यनाथ की सरकार में मंत्री हैं.
इसके बाद भी वह अपनी ही सरकार और बीजेपी के नेतृत्व की आलोचना करने में कोताही नहीं बरतते हैं.
लेकिन अब तक बीजेपी नेतृत्व की ओर से उनकी समस्याओं के समाधान तलाशने की कोशिश नहीं की गई है.
राजनाथ सिंह की तरह संवाद स्थापित करने की जगह बीजेपी नेतृत्व अपने सहयोगी दलों को डराने-धमकाने के संकेत दे रहा है.
अब इसे घमंड कहें या बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह का अति-आत्मविश्वास कि वह किसी तरह का समझौता करने और अपने सहयोगियों की मांगे मानने को तैयार नहीं दिख रहे हैं.
एनडीए के मतभेद
राम विलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी का उदाहरण लीजिए. पासवान भी बीजेपी से दूरी बनाने के संकेत दे रहे थे. और इससे बुरी बात क्या होगी कि दोनों पार्टियों में मतभेदों की बात खुलकर सामने आ रही थी.
बीजेपी के एक सूत्र के मुताबिक़, "ऐसे समय में राजनाथ सिंह जैसा अनुभवी व्यक्ति आसानी से मीडिया में आ रहे मतभेदों को पर्दे के पीछे रख सकता था और बीजेपी नेतृत्व को शर्मसार होने से बचा सकता था."
इससे पहले अटल बिहारी वाजपेयी ने 1998 में एनडीए का गठन किया था. इसके बाद उनका बनाया हुआ गठबंधन 1998 से लेकर 2004 तक सत्ता में रहा.
लेकिन फिर एनडीए दस सालों के लिए सत्ता से बाहर हो गया. और एनडीए को बनाने वाले वाजपेयी भी राजनीति से संन्यास ले चुके थे.
ऐसे में 2014 में एनडीए के घटक दलों को एक छत के नीचे लाना एक जटिल काम था.
ऐसे में राजनाथ सिंह ने अपने भूले-बिसरे राजनीतिक साथियों को याद किया और ऐसे लोगों से भी हाथ मिलाए जो कि उनके पारंपरिक मित्रों में शामिल नहीं थे.
राजनाथ सिंह ने अपने अथक प्रयासों से जिस एनडीए का गठन किया वो उनके राजनीतिक गुरु अटल बिहारी वाजपेयी से भी बड़ा था.
ऐसे में कई लोगों ने राजनाथ सिंह को भविष्य के वाजपेयी के रूप में देखना शुरू कर दिया.
उल्लेखनीय बात ये है कि एनडीए के पुराने घटक दलों में से सिर्फ़ शिव सेना की विचारधारा ही बीजेपी से मेल खाती है.
इसके बाद भी जब-जब दोनों दलों के बीच किसी तरह की उठा-पटक होती थी तो वाजपेयी तत्कालीन शिव सेना प्रमुख बाला साहेब ठाकरे को फ़ोन करके बीच-बचाव करने की कोशिश करते थे.
साल 2014 में राजनाथ सिंह ने अटल बिहारी वाजपेयी की भूमिका को अदा किया. उन्होंने एनडीए के गठन में सामने आने वाली सभी रुकावटों को दूर कर दिया.
आज के दौर में अनुप्रिया पटेल नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में शामिल हैं. लेकिन इसके बावजूद 2019 के आम चुनाव में वह 'अपना दल' के लिए पर्याप्त सीटें हासिल करने में दुश्वारियों का सामना कर रही हैं.
इसके साथ ही एक दूसरे घटक दल सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी की बीजेपी से नाराज़गी जगज़ाहिर है.
इस दल के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर योगी आदित्यनाथ की सरकार में मंत्री हैं.
इसके बाद भी वह अपनी ही सरकार और बीजेपी के नेतृत्व की आलोचना करने में कोताही नहीं बरतते हैं.
लेकिन अब तक बीजेपी नेतृत्व की ओर से उनकी समस्याओं के समाधान तलाशने की कोशिश नहीं की गई है.
राजनाथ सिंह की तरह संवाद स्थापित करने की जगह बीजेपी नेतृत्व अपने सहयोगी दलों को डराने-धमकाने के संकेत दे रहा है.
अब इसे घमंड कहें या बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह का अति-आत्मविश्वास कि वह किसी तरह का समझौता करने और अपने सहयोगियों की मांगे मानने को तैयार नहीं दिख रहे हैं.
एनडीए के मतभेद
राम विलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी का उदाहरण लीजिए. पासवान भी बीजेपी से दूरी बनाने के संकेत दे रहे थे. और इससे बुरी बात क्या होगी कि दोनों पार्टियों में मतभेदों की बात खुलकर सामने आ रही थी.
बीजेपी के एक सूत्र के मुताबिक़, "ऐसे समय में राजनाथ सिंह जैसा अनुभवी व्यक्ति आसानी से मीडिया में आ रहे मतभेदों को पर्दे के पीछे रख सकता था और बीजेपी नेतृत्व को शर्मसार होने से बचा सकता था."
Friday, January 4, 2019
असम के सिलचर में बोले PM मोदी- NRC से कोई भी भारतीय नागरिक नहीं छूटेगा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को असम के सिलचर से लोकसभा चुनाव के लिए बिगुल फूंक दिया है. इस दौरान उन्होंने जहां एक ओर अपनी सरकार की उपलब्धियों को गिनाया, तो दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी पर जमकर हमला बोला. इसके अलावा उन्होंने आश्वास दिया कि National Register of Citizens of India (NRC) की सूची में सभी भारतीय नागरिकों का नाम शामिल होगा. इससे कोई भी नागरिक नहीं छूटेगा. पीएम मोदी की इस रैली में भारी संख्या में लोग पहुंचे. पीएम मोदी ने रैली को संबोधित करते हुए कहा कि यहां की विभूतियों ने देश के लिए बड़े योगदान दिए हैं.
सिलचर में मोदी ने कहा, 'बीजेपी का असम में कोई अस्तित्व नहीं था, लेकिन यहां के लोगों ने जिला परिषद में बीजेपी और सहयोगी पार्टियों को अपना पूरा समर्थन किया, जिसका मैं आभार व्यक्त करता हूं.' उन्होंने कहा, 'आपके प्रेम का कर्ज मेरे ऊपर है. मैं विकास के लिए कोई कसर नहीं छोड़ूंगा. बीजेपी की सरकार बनने के बाद प्रधानमंत्री के रूप में मैं यहां 16 बार आ चुका हूं. इससे पहले असम से रहे प्रधानमंत्री भी इतनी बार यहां नहीं आए.' उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार बड़े फैसले तो लेती ही है, साथ ही कड़े फैसले भी लेती है.
जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, 'मैं आपको भरोसा दिलाने आया हूं कि एनआरसी से कोई भी भारतीय नागरिक नहीं छूटेगा. National Register of Citizens of India (NRC) की प्रक्रिया के दौरान आप लोगों को काफी परेशानी हुई है, जिसका मुझे एहसास है. सोनोवाल सरकार तमाम चुनौतियों के बावजूद एनआरसी को पूरा करने में जुटी हुई है. हमने एनआरसी की प्रक्रिया को आसान करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से भी आग्रह किया था.'
Citizen Amendment Bill पर भी आगे बढ़ रही सरकारः मोदी
उन्होंने कहा, 'हमारी सरकार सिटिजन अमेंडमेंट बिल पर भी आगे बढ़ रही है. ये बिल भावनाओं और लोगों की जिंदगियों से जुड़ा हुआ है. पूरे विश्व में यदि कहीं भी मां भारती में आस्था रखने वाले किसी बेटे-बेटी को प्रताड़ित किया जाएगा, तो वो कहां जाएगा? क्या उसके पासपोर्ट का रंग ही देखा जाएगा? क्या खून का कोई रिश्ता नहीं होता है? मुझे उम्मीद है कि यह बिल जल्द ही संसद से पास होगा और भारत माता में आस्था रखने वाले सभी लोगों के हितों की रक्षा होगी.'
जनसभा को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि आप लोगों ने तमाम साजिशों को विफल करके बीजेपी की सरकार बनाई. मुझे इस बात का दुख है कि कुछ राजनीतिक दल असम के लोगों की भावनाओं को अब भी भांप नहीं पा रहे हैं. उन्होंने कहा कि हमारे रहते हुए देश की एकता और संप्रभुता से समझौता कतई नहीं हो सकता है. असम सिर्फ एक भूभाग नहीं है, बल्कि अपार संभावनाओं और संस्कृतियों से भरा हुआ है. भारत सरकार के लिए अपने नागरिकों की सुरक्षा, सम्मान और समृद्धि सर्वोपरि है. सरकार सबका साथ-सबका विकास के लिए प्रतिबद्ध है.
मोदी बोले- Assam Accord को बीजेपी सरकार ने लागू किया
सिलचर में लोगों को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि यहां के लोगों के हित के लिए सरकार ने Assam accord के क्लॉज नंबर 6 में संशोधन किया और इसको लागू किया है. यह 30-35 साल से लटका हुआ था.
उन्होंने कहा कि हमारे लिए सत्ता से ऊपर हमारा देश है और यहां के नागरिक हैं. हमारी कोशिश है कि देश के लोगों का जीवन आसान हो. सभी का विकास हो और नए भारत के युवा आकांक्षाओं को पूरा किया जा सके. हमारी सरकार इसी दिशा में काम कर रही है. हम न्यू इंडिया के इनफ्रास्ट्रक्चर को बनाने में जुटे हुए हैं. इसमें भी पूर्वोत्तर अगुवाई करने वाला है. पीएम मोदी ने अपनी सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हुए कहा कि पहले असम के 40 फीसदी घरोंं में गैस सिलेंडर थे, लेकिन अब यह संख्या दोगुनी हो गई है. चाय बागान में काम करने वाले असम के लोगों के खाते खुलवाए गए.
सिलचर में मोदी ने कहा, 'बीजेपी का असम में कोई अस्तित्व नहीं था, लेकिन यहां के लोगों ने जिला परिषद में बीजेपी और सहयोगी पार्टियों को अपना पूरा समर्थन किया, जिसका मैं आभार व्यक्त करता हूं.' उन्होंने कहा, 'आपके प्रेम का कर्ज मेरे ऊपर है. मैं विकास के लिए कोई कसर नहीं छोड़ूंगा. बीजेपी की सरकार बनने के बाद प्रधानमंत्री के रूप में मैं यहां 16 बार आ चुका हूं. इससे पहले असम से रहे प्रधानमंत्री भी इतनी बार यहां नहीं आए.' उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार बड़े फैसले तो लेती ही है, साथ ही कड़े फैसले भी लेती है.
जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, 'मैं आपको भरोसा दिलाने आया हूं कि एनआरसी से कोई भी भारतीय नागरिक नहीं छूटेगा. National Register of Citizens of India (NRC) की प्रक्रिया के दौरान आप लोगों को काफी परेशानी हुई है, जिसका मुझे एहसास है. सोनोवाल सरकार तमाम चुनौतियों के बावजूद एनआरसी को पूरा करने में जुटी हुई है. हमने एनआरसी की प्रक्रिया को आसान करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से भी आग्रह किया था.'
Citizen Amendment Bill पर भी आगे बढ़ रही सरकारः मोदी
उन्होंने कहा, 'हमारी सरकार सिटिजन अमेंडमेंट बिल पर भी आगे बढ़ रही है. ये बिल भावनाओं और लोगों की जिंदगियों से जुड़ा हुआ है. पूरे विश्व में यदि कहीं भी मां भारती में आस्था रखने वाले किसी बेटे-बेटी को प्रताड़ित किया जाएगा, तो वो कहां जाएगा? क्या उसके पासपोर्ट का रंग ही देखा जाएगा? क्या खून का कोई रिश्ता नहीं होता है? मुझे उम्मीद है कि यह बिल जल्द ही संसद से पास होगा और भारत माता में आस्था रखने वाले सभी लोगों के हितों की रक्षा होगी.'
जनसभा को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि आप लोगों ने तमाम साजिशों को विफल करके बीजेपी की सरकार बनाई. मुझे इस बात का दुख है कि कुछ राजनीतिक दल असम के लोगों की भावनाओं को अब भी भांप नहीं पा रहे हैं. उन्होंने कहा कि हमारे रहते हुए देश की एकता और संप्रभुता से समझौता कतई नहीं हो सकता है. असम सिर्फ एक भूभाग नहीं है, बल्कि अपार संभावनाओं और संस्कृतियों से भरा हुआ है. भारत सरकार के लिए अपने नागरिकों की सुरक्षा, सम्मान और समृद्धि सर्वोपरि है. सरकार सबका साथ-सबका विकास के लिए प्रतिबद्ध है.
मोदी बोले- Assam Accord को बीजेपी सरकार ने लागू किया
सिलचर में लोगों को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि यहां के लोगों के हित के लिए सरकार ने Assam accord के क्लॉज नंबर 6 में संशोधन किया और इसको लागू किया है. यह 30-35 साल से लटका हुआ था.
उन्होंने कहा कि हमारे लिए सत्ता से ऊपर हमारा देश है और यहां के नागरिक हैं. हमारी कोशिश है कि देश के लोगों का जीवन आसान हो. सभी का विकास हो और नए भारत के युवा आकांक्षाओं को पूरा किया जा सके. हमारी सरकार इसी दिशा में काम कर रही है. हम न्यू इंडिया के इनफ्रास्ट्रक्चर को बनाने में जुटे हुए हैं. इसमें भी पूर्वोत्तर अगुवाई करने वाला है. पीएम मोदी ने अपनी सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हुए कहा कि पहले असम के 40 फीसदी घरोंं में गैस सिलेंडर थे, लेकिन अब यह संख्या दोगुनी हो गई है. चाय बागान में काम करने वाले असम के लोगों के खाते खुलवाए गए.
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